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उत्तराखंड में सोलर रूफटॉप क्रांति पर बड़ा झटका: UPCL अब सरप्लस बिजली मात्र 2 रुपये प्रति यूनिट में खरीदेगा – क्या यह सोलर अपनाने की रफ्तार को रोक देगा?

देहरादून, 3 मार्च 2026 – उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने छत पर सोलर पैनल लगाने वाले उपभोक्ताओं से अतिरिक्त बिजली खरीदने की दर को प्रति यूनिट 2 रुपये तय कर दिया है। उत्तराखंड इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (UERC) के आदेश के आधार पर यह बदलाव लागू हुआ है, जो उपभोक्ताओं के लिए बड़ा झटका है। पहले PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana जैसी स्कीम्स में सरप्लस बिजली को 5 रुपये प्रति यूनिट तक खरीदा जाता था, लेकिन अब नेट मीटरिंग के तहत सरप्लस पर 2 रुपये/kWh की सीमा है। UPCL का 2027 तक 40,000 रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन का लक्ष्य है, लेकिन कम दर से अपनाने की गति प्रभावित हो सकती है।

सरप्लस बिजली की कम दर के कारण

  • डिस्कॉम की वित्तीय मजबूरी: महंगे PPA से नुकसान, सोलर सरप्लस से महंगी बिजली बिक्री घटती है।
  • ग्रिड स्टेबिलिटी: सोलर घंटों में कम टैरिफ, ToD व्यवस्था।
  • राष्ट्रीय ट्रेंड: यूटिलिटी-स्केल सोलर 2-3 रुपये/kWh पर सस्ता।

उत्तराखंड में सोलर स्कीमों में भ्रष्टाचार के प्रमुख मामले – विस्तार से

उत्तराखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (UREDA) में सोलर सब्सिडी योजनाओं (खासकर रूफटॉप सोलर) से जुड़े भ्रष्टाचार के कई गंभीर मामले सामने आए हैं, जो मुख्य रूप से 2016-2019 के बीच उजागर हुए। ये मामले RTI एक्टिविस्ट्स, केंद्रीय जांच टीमों और राज्य सरकार की जांच से सामने आए हैं। यहां प्रमुख घटनाओं का विस्तृत विवरण:

  1. 2016-17 में 15 करोड़ रुपये का सब्सिडी घोटाला (Rooftop Solar Allotment Scam)
  • केंद्र सरकार की योजना के तहत UREDA ने 11 अयोग्य फर्मों को सोलर रूफटॉप प्रोजेक्ट्स आवंटित किए, जिन्हें 15 करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी दी गई।
  • केंद्र के न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मिनिस्ट्री (MNRE) की टीम ने जांच में गंभीर अनियमितताएं पाईं – फर्में तकनीकी और वित्तीय योग्यता पूरी नहीं करती थीं।
  • आरोप: प्रभावशाली लोगों/फर्मों को फेवर किया गया, फर्स्ट-कम-फर्स्ट-सर्व के बजाय पक्षपात।
  • UREDA चीफ ने दावा किया कि सब कुछ गाइडलाइंस के अनुसार था, लेकिन TOI और Saur Energy जैसी रिपोर्ट्स में इसे घोटाला बताया गया।
  • मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा था कि ठोस सबूत मिलने पर SIT जांच होगी।
  1. 2017-18 में 100 करोड़ रुपये प्रोजेक्ट में बड़े घपले (High-Level Probe Findings)
  • एक उच्च स्तरीय जांच (IAS अधिकारी के नेतृत्व में) में पाया गया कि UREDA अधिकारियों ने 100 करोड़ रुपये के रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कीं।
  • प्रोजेक्ट्स को अधिकारियों के रिश्तेदारों और दोस्तों में बांट दिया गया।
  • एक मामले में किसी अधिकारी की पत्नी को प्रोजेक्ट आवंटित किया गया, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन था।
  • योजना के अनुसार प्रोजेक्ट्स सिर्फ इमारतों की छतों पर होने थे, लेकिन खेतों/जमीन पर भी मंजूरी दी गई।
  • पावर सेक्रेटरी राधिका झा ने जांच रिपोर्ट के बाद UREDA को सख्त कार्रवाई के आदेश दिए, और कहा कि “अधिकारियों और आवेदकों की मिलीभगत साबित हुई है”। राज्य सरकार ने UREDA में सफाई की बात कही।
  1. RTI एक्टिविस्ट की शिकायत और केंद्रीय जांच (2017-2019)
  • RTI एक्टिविस्ट सलीम अहमद ने PMO को शिकायत की, जिसके बाद 2017 में MNRE की टीम ने 10 प्लांट्स की सरप्राइज जांच की।
  • रिपोर्ट: 70% सब्सिडी अयोग्य प्रोजेक्ट्स को दी गई
  • एक्टिविस्ट ने 2019 में चीफ सेक्रेटरी को शिकायत दी, FIR दर्ज करने की मांग की – 100 करोड़+ रुपये की सब्सिडी का गबन
  • आरोप: UREDA और पावर डिपार्टमेंट के अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे। दो UREDA अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, लेकिन ठोस एक्शन सीमित रहा।

ये मामले सोलर सब्सिडी के वितरण में पक्षपात, नेपोटिज्म (रिश्तेदारों को फायदा), अयोग्य फर्मों को आवंटन और सब्सिडी के दुरुपयोग को दर्शाते हैं। हाल के वर्षों में भी सब्सिडी वितरण में देरी और अनियमितताओं की शिकायतें आती रही हैं, जो उपभोक्ताओं का भरोसा कम करती हैं।

भारत vs चीन: सोलर पैनल कीमत (2026)

  • भारत: 70,000-80,000 रुपये प्रति kW (बिना सब्सिडी)।
  • चीन: 6-12 रुपये प्रति वाट – स्केल और सब्सिडी से सस्ता। भारत इंपोर्ट पर निर्भर।

भारत को सोलर में आगे बढ़ने के लिए क्या करना चाहिए?

  • डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाना (PLI, ALMM)।
  • ग्रिड/स्टोरेज मजबूत करना।
  • टारगेटेड सब्सिडी, आसान फाइनेंसिंग।
  • इनोवेशन (परोवस्काइट टैंडम सेल्स)।

सोलर क्यों है भविष्य?

सस्ती, साफ, अनंत, क्लाइमेट चेंज से लड़ाई, रोजगार सृजन।

भारत में सोलर संस्थान और R&D मुद्दे

  • NISE (गुरुग्राम), IIT Bombay/Roorkee आदि।
  • मुद्दे: फंडिंग कम, इंपोर्ट निर्भरता, स्केल-अप धीमा।

PM Surya Ghar और अन्य स्कीम्स में सब्सिडी (1 kW के लिए 30,000, 2 kW के लिए 60,000, 3 kW के लिए 78,000 रुपये) मिलती है, लेकिन:
उच्च upfront कॉस्ट: गरीब परिवार 80,000-2 लाख नहीं लगा पाते, मजबूत छत की जरूरत।
अमीरों का ज्यादा लाभ: ज्यादा बिजली इस्तेमाल करने वाले अमीर ज्यादा बचत/सरप्लस कमाई करते हैं।
असमानता: अपनाने वाले ज्यादातर उच्च आय वाले/शहरी, ग्रामीण/निम्न आय वाले कम (अवेयरनेस, फाइनेंसिंग, लैंड/छत कमी)। अध्ययनों से SC/ST, गरीब, मजदूर कम अपनाते हैं।
चुनौतियां: गरीबों के लिए टारगेटेड लोन/सब्सिडी कम, PM-KUSUM किसानों तक पहुंचा लेकिन घरेलू में असमानता बनी।

यह फैसला सोलर को प्रभावित कर सकता है, लेकिन सब्सिडी और पर्यावरण लाभ बने रहेंगे। UERC/UPCL/MNRE वेबसाइट चेक करें। सोलर भारत के सस्टेनेबल भविष्य का आधार बनेगा, अगर भ्रष्टाचार पर सख्ती और इक्विटी पर फोकस करें।

By The Common Man

News and public affairs

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